जंगल के गीत

 गांव के जाने-माने लेखक कवि से एक रिपोर्टर ने सवाल किया। "आप इतने बड़े कलाकार हो, लोग आपको बहुत प्यार और आदर करते हैं... अगर शहर में आप की कला का प्रदर्शन हो तो आपका नाम- शान बहुत बढ़ जाएंगे। तो क्या आप शहर को अपनाना चाहेंगे?" रिपोर्टर ने गांव के जाने माने लेखक-कवि से सवाल किया।

     "आपकी बात सच होगी, पर मैं गांव में ही जन्मा और पला बढ़ा हूं। यह मिट्टी... इसकी खुशबू... मुझे अपनेपन का एहसास दिलाती है, और मेरे यह गीत मेरे जंगल की... मेरे कुदरत की देन है। मुझे शहर में पैसा तो बहुत मिलेगा, प्यार भी मिलेगा, शान- ओ- शौकत भी होगी... लेकिन मेरे गीतों में मिट्टी की वो खुशबू नहीं होगी, जिसकी वजह से लोग मुझे चाहते हैं।" लेखक का जवाब सुनकर रिपोर्टर आगे कुछ ना बोल सका।

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