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Showing posts from March, 2023

जंगल के गीत

 गांव के जाने-माने लेखक कवि से एक रिपोर्टर ने सवाल किया। "आप इतने बड़े कलाकार हो, लोग आपको बहुत प्यार और आदर करते हैं... अगर शहर में आप की कला का प्रदर्शन हो तो आपका नाम- शान बहुत बढ़ जाएंगे। तो क्या आप शहर को अपनाना चाहेंगे?" रिपोर्टर ने गांव के जाने माने लेखक-कवि से सवाल किया।      "आपकी बात सच होगी, पर मैं गांव में ही जन्मा और पला बढ़ा हूं। यह मिट्टी... इसकी खुशबू... मुझे अपनेपन का एहसास दिलाती है, और मेरे यह गीत मेरे जंगल की... मेरे कुदरत की देन है। मुझे शहर में पैसा तो बहुत मिलेगा, प्यार भी मिलेगा, शान- ओ- शौकत भी होगी... लेकिन मेरे गीतों में मिट्टी की वो खुशबू नहीं होगी, जिसकी वजह से लोग मुझे चाहते हैं।" लेखक का जवाब सुनकर रिपोर्टर आगे कुछ ना बोल सका।

तेरा इंतज़ार करें

 रंगो के इस मौसम में, शामिल कुछ प्यार करें; फिर अपने रंग में रंग दे मुझे, आज कैसा मलाल करें! रंगो की हसीन धुंध में, सजाए हसीन सपने; जानकर भी अंजान बन, तू क्यों मुझसे सवाल करें? बावरा मन मेरा राधा सा, मेरे कान्ह कहाँ तुम गुम? ढूंढ़ने में ही तुम्हें आज, फिर सुबह से शाम करें! प्यार का रंग तेरा सबसे पक्का, कच्चे रिश्ते हैं बांधे; सुन ले आज धड़कने मेरी, फिर कभी न दर- किनार करें। नैनों में सपने हज़ार लिए, फिर देखूं तेरी राह; कोई बात नहीं, तू खास है; तो हक से तेरा इंतज़ार करें।

इंतज़ार

      "तो तुम उसे कब बताने वाली हो?"      "क्या?"      "यही कि तुम उससे उससे...."      "तुम पागल हो? कुछ बोलती हो। चलो, मुझे लाइब्रेरी जाना है।"      बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली मीरा एक बड़े घर की समझदार, होशियार और पढ़ाकू लड़की थी। उसे उसी की क्लास में पढ़ता होशियार, समझदार, सबकी इज्ज़त करने वाला- खास तौर पर लड़कियों की इज्ज़त करने वाला, श्याम काफी पसंद था। यह बात उसकी सहेली माधवी को बहुत अच्छे से पता थी, और यह भी कि मीरा अपने दिल की बात श्याम को कभी नहीं कहेंगी। इसलिए जब भी श्याम दिखता था तो माधवी मीरा को छेड़ते हुए कुछ ना कुछ कहती और मीरा हमेशा की तरह सवाल को टाल देती थी।      मीरा जानती थी कि श्याम के ऊपर बहुत सारी जिम्मेदारियाँ हैं। अगर अपने दिल की बात श्याम को बता भी दे फिर भी नतीजा उसे पता था, इसलिए वह कुछ भी नहीं कहती थी। दूसरी तरफ श्याम के दोस्त भी श्याम के मन को जानते थे इसलिए उसे बार-बार मीरा से बात करने के लिए कहते रहते थे। पर मीरा का खानदान बड़ा होने की वजह से वह मीरा से कुछ नहीं कहता...

दूरियां

 दूरियां हमेशा याद ही ले ये ज़रूरी नही। कभी कभी कुछ लोगो से दूरी इतनी बढ़ जाती है, की उनके होने ना होने से फर्क पड़ना ही बंद हो जाता है। ऐसा नहीं है की उन लोगों से नफरत होती है। नहीं, नफरत नही होती, पर प्यार भी नही होता। वो लोग होते तो है, पर उनके अस्तित्व का असर अब नही होता... मेरी जिंदगी पर।

उम्मीद का सिरा

 ज़िंदगी कितनी भी मुश्किल हो उसे खूबसूरत देखना मुझे हमेशा अच्छा लगता हैं। किसी भी सूरत में वो खूबसूरत हो यह मेरी चाह रहती हैं। एक उम्मीद जिसे कभी भी मैं छोड़ना नहीं चाहती। कितना भी टूट जाऊं उम्मीद का एक सिरा है जो कभी नहीं छूटता।

ज़िंदगी हसीन...

 जिंदगी हसीन होती हैं, जानती हूं। पर लगती कभी कभी ही हैं। क्यों... शायद यह भी पता है। पर इस क्यों का जवाब अगर कोई मुझसे पूछे तो जवाब नहीं दे पाऊंगी।

सुकून का रिश्ता

 जरूरी नहीं कि हर रिश्ता आपके लिए प्यार ही लेकर आए। कुछ रिश्ते सुकून भी लाते हैं, जिनका कोई नाम नहीं होता। क्योंकि उन्हें नाम देने की जरूरत नहीं होती। नाम देने से शायद वह सुकून मिट जाए! इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में सुकून के पल बहुत कम लोगों को नसीब होते हैं। इसलिए, जो रिश्ता सुकून देता हो उसे नाम देने की गलती नहीं करनी चाहिए। नाम देने से रिश्तो में अपेक्षाएं बनती है। अपेक्षाएं... जो दिन-ब-दिन बढ़ती ही जाती है। और एक दिन इतनी बढ़ जाती है कि रिश्ता ही खत्म कर देती है। फिर रिश्ते यूं ही दम तोड़ देते हैं।