इंतज़ार

      "तो तुम उसे कब बताने वाली हो?"

     "क्या?"

     "यही कि तुम उससे उससे...."

     "तुम पागल हो? कुछ बोलती हो। चलो, मुझे लाइब्रेरी जाना है।"

     बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली मीरा एक बड़े घर की समझदार, होशियार और पढ़ाकू लड़की थी। उसे उसी की क्लास में पढ़ता होशियार, समझदार, सबकी इज्ज़त करने वाला- खास तौर पर लड़कियों की इज्ज़त करने वाला, श्याम काफी पसंद था। यह बात उसकी सहेली माधवी को बहुत अच्छे से पता थी, और यह भी कि मीरा अपने दिल की बात श्याम को कभी नहीं कहेंगी। इसलिए जब भी श्याम दिखता था तो माधवी मीरा को छेड़ते हुए कुछ ना कुछ कहती और मीरा हमेशा की तरह सवाल को टाल देती थी।

     मीरा जानती थी कि श्याम के ऊपर बहुत सारी जिम्मेदारियाँ हैं। अगर अपने दिल की बात श्याम को बता भी दे फिर भी नतीजा उसे पता था, इसलिए वह कुछ भी नहीं कहती थी। दूसरी तरफ श्याम के दोस्त भी श्याम के मन को जानते थे इसलिए उसे बार-बार मीरा से बात करने के लिए कहते रहते थे। पर मीरा का खानदान बड़ा होने की वजह से वह मीरा से कुछ नहीं कहता था। मीरा और श्याम एक दूसरे को मन ही मन चाहते थे, लेकिन एक दूसरे की परिस्थिति से परिचित वह दोनों कुछ भी नहीं कहते थे। इसी तरह बारहवीं कक्षा समाप्त हो गई।

     पढ़ाई में अच्छा होने की वजह से शाम को स्कॉलरशिप मिलती थी, लेकिन पढ़ाई के लिए उसे विदेश जाना पड़ता इसलिए उसने आगे की स्कॉलरशिप ठुकरा दी। दूसरी तरफ मीरा डॉक्टर बनना चाहती थी, इसलिए वह विदेश पढ़ने के लिए चली गई। अंतिम बार वो श्याम से मिली तब भी दोनों ने पढ़ाई की ही बातें की थी।

     मीरा और श्याम को शायद वह कच्ची उम्र का प्यारनुमा आकर्षण लगा था, जो वक्त रहते भुला दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ वह दोनों अपनी जिंदगी में व्यस्त हो चुके थे फिर भी एक दूसरे को भुला नहीं पाए थे। श्याम पढ़ाई के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए शिक्षक बना। जबकि मीरा अपनी पढ़ाई अच्छे से पूरी करके डॉक्टर बनी। वह जब फिर से भारत  आई, तब कुछ दिन बाद उसके हाथ में टीबी के मरीज़ का एक केस आया। "ईन्हें देखभाल की बहुत जरूरत है" डॉक्टर मीराने  नर्स से यह कहते हुए पूछा "इनके साथ कौन है?"

    नर्स ने कहा, "इनका बेटा।"

    "वह कहां है?"

    "वह तो शाम को आता है।"

    "तो फिर और कोई?"

    "और तो कोई नहीं आता।"

     "इनके बाकी के परिवार वाले?"

     "डॉक्टर! इनके पति की खुद तबियत ठीक नहीं रहती, इनकी बेटी की शादी हो चुकी है, वह बहुत दूर रहती है। बेटा ही सारा घर संभालता है, इनकी दवाई के लिए..." और डॉक्टर मीरा सब समझ गई। उन्होंने नर्स से कहा, "आज शाम को जब इनका बेटा आए तो मुझसे मिलने को कहिएगा।"

     "जी जरूर डॉक्टर।" कहकर नर्स वहां से चली गई।

     शाम को जब श्याम हॉस्पिटल में अपनी माँ के पास लौटा तब नर्स ने उसे डॉक्टर मीरा से मिलने को कहा। डॉक्टर मीरा का नाम सुनकर एक पल के लिए श्याम चौंक गया,लेकिन सोचा कि वह तो यहाँ कैसे...? लेकिन जब मिला तो श्याम की खुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहा, पर उसने यह बात जाहिर नहीं होने दी। सालों बाद मिलने पर डॉक्टर मेरा भी भावुक हो गई थी, लेकिन एक डॉक्टर का फर्ज निभाते हुए उसने कहा... "श्याम आपकी माँ को देखभाल की बहुत जरूरत है। आप पूरे दिन यहाँ नहीं रहते तो क्या आपकी पत्नी यहाँ पर..." मीरा की बात खत्म होने से पहले ही..."डॉक्टर मेरी शादी नहीं हुई है।"

     यह बात जानकर मीरा ने और थोड़ी देर कुछ नहीं कहा फिर ईधर उधर की बाते की। दूसरे दिन से वह श्याम की माँ का खुद ही ख्याल रखने लगी। एक दिन श्याम ने मीरा से कहा, "आप मेरी माँ का इतना ख्याल रखती है, अपनी ड्यूटी के बाद भी आप यहीं पर रहती है, आपके घर वाले... आपका पति..." मीरा ने भी श्याम की बात पूरी होने से पहले ही कहा, "मेरी भी अब तक शादी नहीं हुई है।"

     श्याम की माँ की तबियत में सुधार होने लगा था। कुछ दिन बाद मीरा ने श्याम से हिम्मत करके पूछा की उसने शादी क्यों नही की? जवाब में श्याम ने कहा की वह बहुत सालो से एक लड़की को चाहता हैं और उसे आज तक भूला न पाने की वजह से उसने कभी शादी नहीं की। फिर मीरा से शादी न करने का कारण पूछा तो उसने भी कहा की उसके मन में भी कोई है जिसे वह भी भूल नही पाई, और उसकी आंखे भर आई। श्याम ने धीरे से मीरा के हाथ पर अपना हाथ रखा और मीरा के छलकते आंसुओने अपना हाल-ए -दिल बयाँ कर दिया। इतने सालों से मीरा और श्याम के प्यार का इंतज़ार आज पूरा हुआ।

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