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सबसे कठिन कार्य...

 पता है सबसे कठिन कार्य क्या है?  सबसे कठिन कार्य है स्वयं को स्वीकार करना। जैसे हो वैसे स्वीकार करना। स्वयं की कमियों को स्वीकार करना। दूसरे तुम्हारी कमी को देखते हुए तुमसे कदाचित घृणा भी करते हो, उस बात को भी सहजता से स्वीकार करना। उस घृणा से आहत न होना। यदि हम स्वयं को इस प्रकार से स्वीकार कर ले तो कदाचित हमे आनंदित रहने के लिए किसी कारण की आवश्यकता कभी न पड़े। ✍️ सोनल टेलर 

आदत

 कुछ चीजें ना पसंद हो फिर भी उसकी आदत हो जानी चाहिए अगर ना हो तो भी उसकी आदत डालनी चाहिए। क्योंकि नापसंद चीज की भी आदत डालने से उसे सहन करने का रास्ता मिल जाता है और वह नापसंद बात हम पर अपना असर नहीं छोड़ पाती।

कोशिश मायने रखती हैं।

 अगर ध्यान से देखोगे और समझोगे तो जिंदगी में सिर्फ़ कोशिशें मायने रखती हैं। किसी भी चीज़ को आपने कितनी शिद्दत से किया वो मायने रखता हैं, न की आप उसमें कितना सफ़ल हुए। हमारी असफलताएं हमे यह बताती है की भले आप कामयाब नहीं हुए लेकिन आपने कोशिश तो की थी। इसीलिए वह निष्फलताएं हमे भविष्य में तकलीफ न देकर सीख देती हैं। हम सीखते है की सफ़लता हो चाहे असफलता उसमे छिपी कोशिश बड़ी होती है, सफ़लता या असफलता नही। जिंदगी में हमने कितनी कामयाबी हासिल की वह नही पर हम कितना सीखे है वह मायने रखता हैं। लोग अपनी कामयाबी से ज्यादा वहा तक पहुंचने के सफर को अहमियत देते हैं। जो इंसान को ज़मीन से जुड़े रहने में मदद करती हैं। 

हनुमान

 हरभक्त के दिल में है जिनके लिए बहुमान, बलवान सबसे बढ़कर है रामभक्त हनुमान। सहस्त्र योजन पर भानु फ़ल खाने का है जिसमें साहस, इन्द्र के वज्र से टूटी ठुड्ढी और नाम मिला हनुमान। जिसके दिल में बसते सदा मर्यादा पुरुषोत्तम राम, छबी जो दिल चीर दिखलाए वो तो फक्त हनुमान। गदा धरी एक हाथ दूजे में संजीवनी के लिए पर्वत, मूर्छित लक्ष्मण का संकट हरने वाले संकट मोचन हनुमान। अजर अमर व्यक्तित्व वाले है जो शिवजी के अवतार, अतिप्रिय श्री राम को है हमारे केसरी नंदन हनुमान।

रब भी तेरे जैसा है माँ

 संघर्ष करते देखा तुझको, हर पल मैंने जिंदगी से; मेरे सपनों में अपने सपने ढूंढने वाली सिर्फ तू ही माँ। जगदंबा, शक्ति, काली नहीं तु फिर भी बहुत प्यारी है, मेरी पक्की सहेली तेरी दोस्ती सबसे न्यारी है माँ। शब्द कम पड़ जाते हैं, जब तेरे बारे में कुछ कहती हूं; प्यार मेरा बढ़ जाता है जब तुझे मैं महसूस करती हूं माँ। प्यार कभी तेरा तोला नहीं, दिया तूने उतना मेरा झोला नहीं; रब से कोई शिकायत नहीं, तेरे जैसा मेरा कोई मौला नहीं माँ। मेरे जीवन की आश तु ही, और तु ही सबसे खास माँ; राज़ बताऊं आज की तु रब जैसी है, और रब भी तेरे जैसा माँ!

जंगल के गीत

 गांव के जाने-माने लेखक कवि से एक रिपोर्टर ने सवाल किया। "आप इतने बड़े कलाकार हो, लोग आपको बहुत प्यार और आदर करते हैं... अगर शहर में आप की कला का प्रदर्शन हो तो आपका नाम- शान बहुत बढ़ जाएंगे। तो क्या आप शहर को अपनाना चाहेंगे?" रिपोर्टर ने गांव के जाने माने लेखक-कवि से सवाल किया।      "आपकी बात सच होगी, पर मैं गांव में ही जन्मा और पला बढ़ा हूं। यह मिट्टी... इसकी खुशबू... मुझे अपनेपन का एहसास दिलाती है, और मेरे यह गीत मेरे जंगल की... मेरे कुदरत की देन है। मुझे शहर में पैसा तो बहुत मिलेगा, प्यार भी मिलेगा, शान- ओ- शौकत भी होगी... लेकिन मेरे गीतों में मिट्टी की वो खुशबू नहीं होगी, जिसकी वजह से लोग मुझे चाहते हैं।" लेखक का जवाब सुनकर रिपोर्टर आगे कुछ ना बोल सका।

तेरा इंतज़ार करें

 रंगो के इस मौसम में, शामिल कुछ प्यार करें; फिर अपने रंग में रंग दे मुझे, आज कैसा मलाल करें! रंगो की हसीन धुंध में, सजाए हसीन सपने; जानकर भी अंजान बन, तू क्यों मुझसे सवाल करें? बावरा मन मेरा राधा सा, मेरे कान्ह कहाँ तुम गुम? ढूंढ़ने में ही तुम्हें आज, फिर सुबह से शाम करें! प्यार का रंग तेरा सबसे पक्का, कच्चे रिश्ते हैं बांधे; सुन ले आज धड़कने मेरी, फिर कभी न दर- किनार करें। नैनों में सपने हज़ार लिए, फिर देखूं तेरी राह; कोई बात नहीं, तू खास है; तो हक से तेरा इंतज़ार करें।